पुणे की सेंटर फॉर मटेरियल्स फॉर इलेक्ट्रॉनिक्स टेक्नोलॉजी (सीमेट) के वैज्ञानिकों ने कम लागत वाला स्वदेशी पॉलिमर स्वाब तैयार करने में कामयाबी हासिल की है। केंद्र के डॉ. मिलिंद कुलकर्णी के मुताबिक, स्वाब का उपयोग कोरोनावायरस परीक्षण के लिए एकत्रित किए जाने वाले सैंपल को रखने में काम आता है। अभी इसे इटली, अमेरिका और जर्मनी से मंगाया जाता है। डॉ. मिलिंद ने बताया कि चूंकि, पूरी दुनिया इस समय कोरोना संकट से जूझ रही है। खासतौर पर इटली, अमेरिका और जर्मनी में इस वक्त कोरोना के सबसे ज्यादा मामले हैं। वहीं, भारत में भी संक्रमण के मामले काफी बढ़ चुके हैं। इसलिए आने वाले दिनों में स्वाब की कमी हो सकती है। मुसीबत की इस घड़ी में यह स्वदेशी स्वाब देश के काफी काम आ सकता है। डॉ. मिलिंद के अनुसार, अभी स्वदेशी स्वाब का प्रोटोटाइप तैयार हुआ है। अब इसके क्लिनिकल ट्रायल की तैयारी की जा रही है। इसकी जिम्मेदारी यूरोलॉजिस्ट डॉ. केएन श्रीधर को दी गई है। डॉ. मिलिंद के अनुसार, आने वाले दिनों में लाखों स्वाब की जरूरत पड़ेगी। उनकी मशीन एक मिनट में 1 हजार से 2 हजार स्वाब तैयार करने में सक्षम है। " alt="" aria-hidden="true" />
गुजरात में 10 दिनों के अंदर यह वेंटिलेटर तैयार हुआ है। इसकी कीमत 1 लाख रुपये है।